प्रेस विज्ञप्ति
- एड्स से जीता आत्मविश्वास |
- राष्ट्रीय खेल दिवस पर एड्स संक्रामित बच्चों की प्रतियोगिता |
- विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजय, कुलदीप, सुमन विकास, विवेक व ज्योति विजयी |
कोटा- 28 अगस्त 2014। मन में अगर विश्वास हो तो जिंदगी की कोई भी जंग जीती जा सकती है यह एक बार फिर नन्हे-नन्हे एड्स संक्रमित बच्चों ने अपने अड़िग हौसलों से सबित कर दिया। राष्ट्रीय युवा योजना, कोटा के द्वारा राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष में एक दिन पूर्व रेलवे स्टेडियम में खेल दिवस हर्शोल्लास के साथ से मनाया गया जिसमें संस्कार संस्था के संक्रमित विद्याथियों व स्टेशन क्षेत्र के 15 विद्यालयों ने भाग लिया। इस दौरान संस्था अध्यक्ष निधि प्रजापति ने विद्यार्थियों को जीवन में खेलों के महत्व से अवगत कराया व बताया कि मानव जीवन की सफलता के लिए तीन शक्तियों के विकास की आवश्यकता है शारीरिक, मानसिक व आत्मिक जिनका सर्वांगीण विकास खेलों के माध्यम से ही संभव हैै। स्काउट एण्ड गाइड के पूर्व राज्य संगठन आयुक्त राजेश कसेरा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा की खेलकूर से व्यक्तित्व का विकास होता है। खेल स्फूर्ति, ताजगी और जीवन में गतिशीलता लाते है। शरीर को तंदरूस्त बनाए रखने का ये अद्वितीय साधन है। कार्यक्रम संयोजक यज्ञ दत्त हाड़ा ने कहा की खेल व्यक्ति की आत्मा होती है और खेल भावना आत्मा का श्रृंगाार। यहाॅ व्यक्ति को पारस्परिक सहयोग, संगठन, अनुशासन और सहनशीलता की शिक्षा देती है। खेलों के बिना जीवन अधूरा है। इस अवसर पर तीन वर्गों में 100मी. , 400 मी. व नींबू दौड़ प्रतियोगिता तीन वर्गो में आयोजित कि गई। जिसमें प्रथम वर्ग में एड्स संक्रमित बच्चों की 100 मी. रेस व नींबू दौड हुई जिसमें श्याम, कुलदीप, व विजय प्रथम, नितेश, वैशनवी द्वितीय व उषा, विजय व विकास तृतीय रहे। द्वितीय वर्ग में 100 मी.व 400 मी. में छात्रा वर्ग में ज्योति प्रथम, प्रिया द्वितीय व रति व निशा तृतीय रही। तृतीय वर्ग में 100 मी.व 400 मी. में विकास व विवके प्रथम, राहुल, तोहिद, आकाश द्वितीय व अनुराग, आलोक, आकाश व संदीप तृतीय रहे। विजेताओं को पुरूस्कार 30 अगस्त को मेजर ध्यान चंद के पोते व बारां में खेल विभाग में कार्यरत विशाल सिंह जी के द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर आर्ट आफॅ लिविंग की प्रशिक्षिका रूचि व्यास तथा संस्था के अमित सूद, अजय वर्मा, धीरज वर्मा, गौरव भटनागर, अचलेश मीणा, अल्का, सुरभि, प्रमुख रहे व अंत में नीतू मेहता धन्यवाद दिया।




